आईएमएस नोएडा में बियॉन्ड क्लासरूम कार्यक्रम की शुरुआत
नोएडा। बदलते शिक्षा और रोजगार परिदृश्य में विद्यार्थियों को भविष्य के लिए तैयार करने के उद्देश्य से आईएमएस नोएडा में बियॉन्ड क्लासरूम कार्यक्रम शुरु की गयी। सेक्टर-62 स्थित संस्थान परिसर में आयोजित पैनल डिस्कशन के दौरान शिक्षा जगत के विशेषज्ञ, विद्यालयों के प्रधानाचार्य तथा आईएमएस नोएडा के वरिष्ठ शिक्षाविद, छात्रों के साथ भविष्य के करियर, कौशल विकास और नई शिक्षा नीति से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की। पैनल के दौरान महर्षि विद्या मंदिर के प्रधानाचार्य उमेश सिंह, शिक्षाविद् एवं लेखिका डॉ. भावना शर्मा, शिक्षाविद विनीश वार्ष्णेय, आईएमएस नोएडा की डीन डॉ. वर्तिका चतुर्वेदी एवं प्रो. राशि गर्ग ने भविष्य की चुनौतियों और अवसरों चर्चा कर विद्यार्थियों का मार्गदर्शन किया।
चर्चा के दौरान पढ़ाई और अपने दीर्घकालीन करियर लक्ष्यों के बीच संतुलन बनाने पर अपना विचार प्रकट करते हुए उमेश सिंह ने कहा कि सोशल मीडिया से दूर भागने की आवश्यकता नहीं है, बल्कि उसका समझदारी और उद्देश्यपूर्ण उपयोग करना आवश्यक है। समय प्रबंधन, कौशल विकास और स्पष्ट करियर लक्ष्य ही विद्यार्थियों को भविष्य की सफलता की ओर ले जाते हैं। रोजगार पाने के लिए डिग्री महत्वपूर्ण है या कौशल का उत्तर देते हुए डॉ. भावना शर्मा ने कहा कि डिग्री महत्वपूर्ण है, लेकिन उससे भी अधिक महत्वपूर्ण है वह वातावरण, अवसर और मार्गदर्शन जो कॉलेज प्रदान करता है। सही कॉलेज और सही कौशल का संयोजन ही विद्यार्थियों को भविष्य के प्रतिस्पर्धी रोजगार बाजार में सफल बनाता है।
बदलते समय में कुछ कंपनियों ने कुछ पदों के लिए डिग्री संबंधी अनिवार्यता कम कम किया है, इस विषय पर अपना विचार प्रकट करते हुए विनीश वार्ष्णेय ने कहा कि अंक हमेशा महत्वपूर्ण रहेंगे। अच्छे अंक आपको अवसरों के प्रारंभिक द्वार तक पहुँचाने में मदद करते हैं। लेकिन कॉलेज में प्रवेश के बाद परिस्थितियां बदल जाती हैं। वर्ष 2026 का नियोक्ता केवल यह नहीं पूछता कि आपके कितने प्रतिशत अंक हैं। वह जानना चाहता है कि क्या आप समस्याओं का समाधान कर सकते हैं? क्या आप प्रभावी ढंग से संवाद कर सकते हैं? क्या आप टीम में कार्य कर सकते हैं? क्या आप नई परिस्थितियों और तकनीकों के अनुसार स्वयं को ढाल सकते हैं? आज के कार्यक्रम का समापन करते हुए डॉ. वर्तिका चतुर्वेदी ने कहा कि अच्छे अंक महत्वपूर्ण है, लेकिन वास्तविक सफलता उन कौशलों से मिलती है जो आपको ज्ञान को व्यवहार में बदलने की क्षमता प्रदान करते हैं।


