राजकीय पशु चिकित्सालय में 3 दिन से ताला, बीमार पशु लेकर भटक रहे पशुपालक, भाकियू लोकशक्ति ने खोला मोर्चा

राजकीय पशु चिकित्सालय में 3 दिन से ताला, बीमार पशु लेकर भटक रहे पशुपालक, भाकियू लोकशक्ति ने खोला मोर्चा

गौतमबुद्ध नगर के बरौला स्थित राजकीय पशु चिकित्सालय पिछले 3 दिन से बंद पड़ा है। अस्पताल के मुख्य द्वार पर ताला लटका हुआ है और दरवाजे पर नोटिस चस्पा है कि जनगणना ड्यूटी के कारण दिनांक 5, 6 व 7 नवंबर 2026 को चिकित्सालय बंद रहेगा।

इस चिकित्सालय से बरौला सहित 30-32 गांवों के पशुपालक जुड़े हुए हैं। रोजाना 10-15 पशुपालक अपने बीमार पशुओं को लेकर आ रहे हैं और बिना इलाज के वापस लौट रहे हैं। अस्पताल में डॉक्टर, फार्मासिस्ट, चपरासी व चौकीदार सहित पूरा स्टाफ अनुपस्थित है।

आज एक पशुपालक अपनी बीमार गाय को लेकर पहुंचा। गाय सर्दी-बुखार से सुकड़ रही थी, लेकिन इलाज न मिलने से उसे भी वापस लौटना पड़ा।

राष्ट्रीय महासचिव चौधरी बीसी प्रधान ने कहा कि "आज महानगर अध्यक्ष टीम के साथ वहां पहुंचे और जो वहां देखा वह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। सरकार की जनगणना ड्यूटी के नाम पर गांवों की स्वास्थ्य व्यवस्था ठप कर दी गई है। पशुपालक सुबह से शाम तक अपने बीमार पशुओं को लेकर भटक रहा है। प्रशासन को तुरंत इस पर संज्ञान लेना चाहिए और बरौला पशु चिकित्सालय में वैकल्पिक व्यवस्था करनी चाहिए, ताकि किसी भी पशुपालक को बिना इलाज वापस न लौटना पड़े। हम इस मुद्दे को उच्च अधिकारियों तक पहुंचाएंगे।"

इस संबंध में महानगर अध्यक्ष हरेन्द्र सिंह ने कहा कि "पशु चिकित्सालय बना हुआ है, दवाई की व्यवस्था भी है, लेकिन इलाज करने वाला कोई नहीं है। जनगणना का काम जरूरी है, लेकिन आपातकाल में अस्पताल बंद करना गलत है। कम से कम एक डॉक्टर की ड्यूटी अस्पताल में रहनी चाहिए थी। किसान-पशुपालक का पशु ही उसकी पूंजी है, वह बीमार हो जाए तो वह कहां जाए? हमने CMO से भी बात की, लेकिन कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। स्कूल पहले ही बंद हो रहे हैं, अब अस्पताल भी बंद होने लगे तो गांवों का क्या होगा?"

उन्होंने जिला प्रशासन व पशुपालन विभाग से मांग की है कि बरौला पशु चिकित्सालय में तत्काल स्टाफ की व्यवस्था की जाए और जनगणना के दौरान भी आपातकालीन सेवाएं चालू रखी जाएं, जिससे लोगों को असुविधा न हो।